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मुंबई। अपराध किसी भी दौर में रुका नहीं। हां यह जरुर है की अपराध का तरीका बदला है। आज सायबर क्राइम में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल यह अपराध बढ़ता जाता है। तरह-तरह के फ्रॉड सामने आ रहे हैं। हाल में एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है. जहाज पर काम करने वाले नविक भाइयों के परिजनों के साथ सायबर फ्रॉड हो रहा है. हाल के दिनों में कई ऐसे सेलर( sailors) जो कि अभी शिप (ship ) पर हैं, उनके परिजनों को कॉल आई कि आपका बेटा फला देश मे गंभीर मामले में फस गया है उसको बचाना है तो तत्काल इतना पैसा ट्रांसफर कर दीजिए। परिजन इस तरह की फेक कॉल से घबरा भी जाते हैं और अपना धन भी गवा देते हैं। हाल में में एक 3rd ऑफिसर के पिता को कॉल आई कि आपका बेटा श्रीलंका में रेप के आरोप में गिरफ्त में है ऐसे में इतना पैसा आप भेजिये तभी वह छूट सकता है बुजुर्ग पिता ने फेक कॉल पर विश्वास करते हुए 7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिये। ऐसे कई कॉल और ईमेल इस तरह के परिजनों को आए। इन सबको देखते हुए डीजी शिपिंग ने बड़ा कदम उठाते हुए एक एडवाजरी जारी की है । डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ़ शिपिंग (क्रू ) कैप्टन (डॉक्टर ) डेनियल जे जोसफ ने इस बाबत एक पत्र भी जारी किया है.

नौवहन महानिदेशालय(Directorate General of Shipping) ने नाविकों और उनके परिवारों के साथ हो रहे ऑनलाइन फर्जीवाड़े को देखते हुए एक एडवाइजरी जारी की है। महानिदेशालय के ध्यान में यह बात आई है कि ऐसे व्यक्ति जो समुद्री जहाज़ों पर नाविकों के साथ जुड़े होने का झूठा दावा करते हैं या ऐसा होने का दिखावा करते हैं और फिर वे नाविकों और उनके परिजनों को ठगी का शिकार बनाते हैं। 

ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां अनजान व्यक्ति टेलीकॉल, व्हाट्सएप के जरिए या फिर संदेश और ईमेल आदि के जरिये नाविकों के परिजनों से संपर्क किया है। वे परिजनों को कहते हैं कि जहाजों पर काम करने वाले उनकी फैमिली के सदस्य तस्करी जैसी गंभीर अवैध गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इसके अलावा नशीले पदार्थ, चोरी, बलात्कार और हत्या आदि मामलों में फंसे होने की झूठी सूचना देकर उनकी रिहाई या सहायता करने की बात करते हुए पैसे की डिमांड की जाती है। महानिदेशालय ने कहा है कि ये दावे आम तौर पर झूठे हैं और बिना सोचे-समझे परिवार को धोखा देने और उनका शोषण करने के लिए बनाए गए हैं। 

नौवहन महानिदेशालय ने नाविकों के परिवार से साफ कहा है कि ऐसे किसी भी कॉल या ईमेल प्राप्त करते समय अत्यधिक सावधानी और सतर्कता बरतें। क्योंकि इसका पता लगाना महत्वपूर्ण है। ऐसे कॉल करने वाले, संदेश या ईमेल भेजने वाले का सटीक विवरण जुटाना जरूरी है। उचित सत्यापन के बिना अज्ञात व्यक्तियों को किसी भी तरह का पैसा ना दें। ऐसे कॉल या ईमेल प्राप्त होने की स्थिति में नाविकों के परिवार के सदस्यों से आग्रह किया जाता है
सतर्क रहें और तुरंत मामले की सूचना भर्ती के संबंधित नोडल अधिकारी को दें। 

प्लेसमेंट सर्विसेज (आरपीएस) एजेंसी या जहाज-मालिकों के प्रतिनिधि जिनके माध्यम से नाविक ने काम किया है, उसे
पोत पर अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया है। आरपीएस एजेंसियां/जहाज-मालिक को इसे लेकर निर्देश दिया गया है कि वे इस मामले में त्वरित कदम उठाएं ताकि उत्पीड़न को रोका जा सके और नाविकों के साथ-साथ उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 

निदेशालय ने सभी नाविकों और उनके परिजनों को इस तरह की सुरक्षा के लिए सामूहिक रूप से मिलकर काम करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि हमारे नाविकों और उनके परिवार के सदस्यों के हित और उन्हें इस तरह के शिकार होने से रोकने के लिए हम कटिबद्ध हैं। इसके साथ ही महानिदेशालय ने इस तरह के मामलों में कोई भी दिक्कत आने पर तुरंत संपर्क करने के लिए टेलीफोन नंबर भी जारी किया है। ऐसी किसी भी स्थिति में पूछताछ या सहायता के लिए आप दूरभाष नंबर 022-22612351 पर संंपर्क कर सकते हैं या फिर dgcommcentre-dgs@nic.in पर ईमेल कर सकते हैं।

एक बात का ध्यान रखें जब भी इस तरह के कॉल आएं तो घबराएं नही पूरी जांच करें अपने नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं। डीजी शिपिंग में अपनी बात रखें। कभी कभी शिप पर वाई फाई काम नहीं करता है ऐसे में थोड़ा वेट करें। और सीमेन भाइयों से यह निवेदन है कि आप जब भी शिप पर जाएं अपना कॉन्टेक्ट लेटर और क्रू मैनेजर का नम्बर सम्भव हो तो शिप के अन्य साथियों का नम्बर घर पर छोड़ कर जाएं। या शिप पर पहुचकर वाट्सप के माध्यम से सूचित करें।
REPORT-ROHIT RAMWAPURI

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